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| 24501 | चढाइ | ना. | ४. आक्रमण, हमला। |
| 24502 | चढाइनु | क.क्रि. | १. उकालिनु। |
| 24503 | चढाइनु | क.क्रि. | २. समर्पण गरिनु। |
| 24504 | चढाउ | ना. | १. चढाइ। |
| 24505 | चढाउ | ना. | २. उकालो। |
| 24506 | चढाउ | ना. | ३. बढिबढाउ, उन्नति। |
| 24507 | चढाउनु | स.क्रि. | १. माथि पुऱ्याउनु उकाल्नु। |
| 24508 | चढाउनु | स.क्रि. | २. समर्पण गर्नु दिनु; टक्र्याउनु, अर्पण गर्नु, सुम्पनु। |
| 24509 | चढ्दो | वि. | १. उँभो लागेको, बढ्दो उन्नतितिर लागेको। |
| 24510 | चढ्दो | वि. | २. बढ्दो उमेरको। |
| 24511 | चणक | ना. | चना। |
| 24512 | चण्ड | वि. | १. प्रचण्ड, उग्र, रिसाउने स्वभावको; जन्ड; रुष्ट; खरो। |
| 24513 | चण्ड | वि. | २. उष्ण। |
| 24514 | चण्ड | वि. | ३. फुर्तिलो। |
| 24515 | चण्डता | ना. | चण्ड हुनाको भाव, गुण वा अवस्था, उग्रता, तीव्रता। |
| 24516 | चण्डांशु | ना. | सूर्य; रवि। |
| 24517 | चण्डातक | ना. | १. बाहाँकटे चोलो। |
| 24518 | चण्डातक | ना. | २. चरना, जाँघे। |
| 24519 | चण्डातक | ना. | ३. छोटो पेटीकोट साया। |
| 24520 | चण्डाल | ना. | १. ज्यादै नीच र घृणित जाति वा त्यस जातिका मानिस, चाण्डाल। |
| 24521 | चण्डाल | ना. | २. दुष्कर्मी, दुष्ट, क्रूर काम गर्ने व्यक्ति। |
| 24522 | चण्डालिनी | ना. | दुष्ट स्वभावकी स्त्री; चाण्डालिनी; चन्डाल्नी। |
| 24523 | चण्डिका | ना. | दुर्गाको एक रूप, चण्डी। |
| 24524 | चण्डी | ना. | १. दुर्गा देवी। |
| 24525 | चण्डी | ना. | २. सात सय श्लोक भएको दुर्गाको माहात्म्य लेखिएको पुस्तक, सप्तशती। |
| 24526 | चण्डी | ना. | ३. दुई नगण, दुई सगण, एक गुरु हुने र आठौं अक्षरमा विश्राम हुने एक छन्द। |
| 24527 | चण्डी पाठ | ना. | सप्तशती पाठ गर्ने काम। |
| 24528 | चण्डीश | ना. | चण्डीका स्वामी अर्थात् शिव। |
| 24529 | चण्डू | ना. | हे. चन्डु। |
| 24530 | चण्डेश्वर | ना. | रक्तवर्ण रूपका शिवजी। |
| 24531 | चण्डेश्वरी | ना. | काभ्रे जिल्लाको बनेपा सहरको पूर्वोत्तरमा स्थित एक देवी दुर्गा। |
| 24532 | चतरा | ना. | कोसी अञ्चलअन्तर्गत सुनसरी जिल्लामा रहेको एक स्थान। |
| 24533 | चतरा नहर | ना. | सोही ठाउँमा नेपालभारत सहयोगबाट सप्तकोसीको पानीमा बाँध बाँधी बनाइएको, ५६,५०० हेक्टर जमिनको सिंचाइ हुने एक प्रसिद्ध नहर। |
| 24534 | चतुर् | ना. | १. चारको सङ्ख्या। |
| 24535 | चतुर् | ना. | २. समास भएका शब्दमा चार भन्ने अर्थ बुझाउने पूर्वपद (चतुर्गण, चतुर्युग, चतुर्वर्ण इ.)। |
| 24536 | चतुर | वि. | १. चलाक, होसियार, बाठो, चनाखो; चतुरो; कुशल, मेधावी, सिपालु। |
| 24537 | चतुर | वि. | २. फुर्तिलो, छिटोछरितो। |
| 24538 | चतुर | वि. | ३. सुन्दर, प्रिय। |
| 24539 | चतुरङ्गिणी | ना. | १. हात्ती, घोडा, रथ र पैदल चार अङ्गद्वारा सुसज्जित फौज। |
| 24540 | चतुरङ्गिणी | ना. | २. पासाको खेल। |
| 24541 | चतुराइ | ना. | चतुरो हुनाको भाव, गुण वा अवस्था, बठ्याइँ, चातुर्य, चलाकी। |
| 24542 | चतुरानन | वि. | १. चार मुख भएको। ना. |
| 24543 | चतुरानन | वि. | २. ब्रह्मा। |
| 24544 | चतुराश्रम | ना. | वर्णाश्रम व्यवस्थाअनुसार जीवनका चार अवस्था (ब्रह्मचर्य, गार्हस्थ, वानप्रस्थ र सन्न्यास)। |
| 24545 | चतुरो | वि. | हे. चतुर। |
| 24546 | चतुर्थ | वि. | चौथो, चारौं। |
| 24547 | चतुर्य खण्ड | ना. | भूगर्भशास्त्रमा जीव कल्पको विभाजनमा पर्ने समयको चौथो खण्ड, नवजीवनका समयको विभाजनका तृतीय खण्डपछि आउने अन्तिम खण्ड। |
| 24548 | चतुर्य हिमयुग | ना. | पुरातत्त्वशास्त्रअनुसार आजभन्दा असी हजार वर्षपहिले प्रारम्भ भएको हिमयुग, तृतीय हिमानी वा तृतीय हिमयुगभन्दा पछिको हिमयुग, चार हिमयुग वा चार हिमानीमध्ये अन्तिम हिमयुग। |
| 24549 | चतुर्थांश | ना. | चौथाइ, चौथो भाग, चौथाइ भाग। |
| 24550 | चतुर्थांशक | ना. | कुल पुनरावृत्तिलाई चार भागमा बाँड्ने विचारको मान। |