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| 85801 | सनेस | ना. | १. एउटा कुरो भने झैँ गरी अर्को कुरो जनाउने काम; छनक; सुइँको। |
| 85802 | सनेस | ना. | २. छोटकरी समाचार; सन्देश। |
| 85803 | सनेस | ना. | ३. कोसेली; उपहार। |
| 85804 | सन्कनु | अ.क्रि. | १. सनक वा रिस चढ्नु; उत्तेजित हुनु। |
| 85805 | सन्कनु | अ.क्रि. | २. बतासे कुरा गर्न थाल्नु; सिल्लीजस्तो हुनु। |
| 85806 | सन्काइ | ना. | सन्कने वा सन्काउने क्रियाप्रक्रिया। |
| 85807 | सन्काइनु | क.क्रि. | सन्काउने काम गरिनु। |
| 85808 | सन्काउनु | स.क्रि. | १. आँखाले सङ्केत गर्नु वा सूचना दिनु। |
| 85809 | सन्काउनु | स.क्रि. | २. तरल पदार्थ छिटोछिटो पिउनु। प्रे.क्रि. |
| 85810 | सन्काउनु | स.क्रि. | ३. उत्तेजित पार्नु; झोक चलाउनु। |
| 85811 | सन्काउनु | स.क्रि. | ४. बौलाहा बनाउनु। |
| 85812 | सन्कासन्की | ना. | परस्परमा सन्कने काम; रन्कारन्की (उदा.- कुरा गर्दागर्दै तिनीहरू सन्कासन्की पो गर्न थाले)। |
| 85813 | सन्काहा | वि. | १. सन्कने बानी भएको; सन्की। |
| 85814 | सन्काहा | वि. | २. अर्द्धसिल्ली। |
| 85815 | सन्की | वि. | सन्कने स्वभावको; सन्काहा। |
| 85816 | सन्को | ना. | १. सन्कने चाल; सन्कने काम; सनक। |
| 85817 | सन्को | ना. | २. एकै सासमा पिइसकिने घुट्को; पियाइको खेप। |
| 85818 | सन्च | ना. | सन्चो; सुबिस्ता। (उदा.- नानीलाई सन्च आमालाई हाइसन्च)। |
| 85819 | सन्चो | ना. | १. रोग, पीडा आदिको निवारण; आरोग्य; सन्च। |
| 85820 | सन्चो | ना. | २. आपत्, झन्झट, बाधा आदि केही नरहने स्थिति; सुबिस्ता; आनन्द। |
| 85821 | सन्चोबिसन्चो | ना. | स्वस्थता र अस्वस्थता; नीरोगित्व र बिमारी। |
| 85822 | सन्छेप | ना. | १. छोटकरी भनाइ वा लेखाइ; सङ्क्षेप। |
| 85823 | सन्छेप | ना. | २. इसारा; सङ्केत। |
| 85824 | सन्जना | ना. | जाली झैँ बन्ने गरी मसिनु पारेर काटिएको मुला आदिको चाना; भुजुरी। |
| 85825 | सन्जाप | ना. | भोटो, दौरा, सुरुवाल आदिको छेउमा सिएर गाँसिने कपडाको धर्सो; सेप्टी; मोहोजी; मञ्जी। |
| 85826 | सन्जे | ना. | १. सन्ध्या; साँझ। |
| 85827 | सन्जे | ना. | २. साँझमा जपिने मन्त्र; गायत्रीजप। |
| 85828 | सन्जेकाल | ना. | साँझको वेला; सन्ध्याकाल; सायङ्काल। (उदा.- सन्जेकालमा रोए अलच्छिन लाग्छ रे )। |
| 85829 | सन्जोग | ना. | आकस्मिक तारतम्य; संयोग; भवितव्य। |
| 85830 | सन्जोगे | ना. | भान्सामा चाहिने नुन, मसला आदि हाल्ने काठ वा टिनको खण्डेदार भाँडो; पञ्चपाला। |
| 85831 | सन्झ्याल | ना. | गारो बाहिर निस्केको पुरानो छाँटको कलात्मक बुट्टे झ्याल। |
| 85832 | सन्टरी | ना. | १. पालो बस्ने व्यक्ति; पहरेदार; पाले; सन्तरी। |
| 85833 | सन्टरी | ना. | २. पहरा; पालो; चपट। |
| 85834 | सन्ठ | वि. | १. जिउ मात्र देख्नाको तर बुद्धि नभएको; स्वाँठ; मूर्ख; लन्ठ। |
| 85835 | सन्ठ | वि. | २. उच्छृङ्खल; उत्ताउलो। |
| 85836 | सन्ठिनु | अ.क्रि. | १. स्वाँठ हुनु; धूर्त बन्नु। |
| 85837 | सन्ठिनु | अ.क्रि. | २. लन्ठिनु। |
| 85838 | सन्ठी | ना. | सनको पाट निकालिसकेपछिको झिँजा; सन ताछेको लट्ठी। |
| 85839 | सन्ड / सन्डो | वि. | १. मोटोघाटो वा बलियोबाङ्गो भईकन मूर्ख; भुसतिघ्रे र मूढ। |
| 85840 | सन्ड / सन्डो | वि. | २. मिठामसिना कुराले आफ्नो काम पट्याउन जान्ने। |
| 85841 | सन्ड / सन्डो | वि. | ३. चाप्लुसी गर्न र धुत्न सिपालु; धूर्त चालको बाठो। |
| 85842 | सन्ड / सन्डो | वि. | ४. लाज, इज्जत केही नभएको। |
| 85843 | सन्ड्याइ | ना. | सन्ड्याउने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया। |
| 85844 | सन्ड्याइनु | क.क्रि. | सन्ड्याउने काम गरिनु। |
| 85845 | सन्ड्याउनु | स.क्रि. | सन्ड भएर अरूलाई झुक्यानमा पार्नु; धुत्नु; ठग्नु। |
| 85846 | सन्डयु | ना. | मसिना किरा जाँदा चोपमा टाँसिने, मसिनै पात र हाँगा भएको एक जातको बुटी। |
| 85847 | सन्त | ना. | १. व्यवहार र विषयमा नअल्झी धर्म वा पुण्य कार्यमा लागेको पुरुष; सज्जन व्यक्ति; साधु; सन्न्यासी। |
| 85848 | सन्त | ना. | २. अँजुली; अञ्जली। वि. |
| 85849 | सन्त | ना. | ३. शान्त स्वभावको; विनम्र। |
| 85850 | सन्तति | ना. | १. सन्तान; छोराछोरी, नातिनातिना आदि। |