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| 13601 | कवचधारी | वि. | कवच धारण गर्ने, कवच लगाएको (योद्धा); कवची। |
| 13602 | कवची | वि. | कवचधारी। |
| 13603 | कवयित्री | ना. | कविता रच्ने स्त्री; स्त्री कवि। |
| 13604 | कवरी | ना. | आइमाईहरूको सजाइएको केशपाश; चुल्ठो; वेणी। |
| 13605 | कवर्ग | ना. | देवनागरी लिपिको वर्णव्यवस्थामा व्यञ्जनवर्णका पाँच वर्ग (कवर्ग, चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, पवर्ग) मध्ये पहिलो वर्ग; क, ख, ग, घ, ङ- यी पाँच अक्षर। |
| 13606 | कवल | ना. | दलान, पसल, आदिका दुई थामका बिचको स्थान; दुकानको लङ वा भागलाई बिच बिचका खम्बा वा द्वारले छुट्याइएको सानो खण्ड। |
| 13607 | कवाइ टाँक | ना. | प्रायः तामो, पित्तल आदि धातुबाट बनाइएको, पाइन्ट, जाकेट आदिमा लगाइने बुट्टेदार वा सादा टाँक (ली बटम )। |
| 13608 | कवाज | ना. | सैनिकहरूलाई सामूहिक रूपमा दिइने विभिन्न प्रकार एवं कक्षाको शारीरिक प्रशिक्षण; फौजी रफत; सैनिक तालिम। |
| 13609 | कवायद | ना. | हे. कवाज। |
| 13610 | कवास | ना. | हे. कपास। |
| 13611 | कवासी | वि. | कपास जस्तै सेतो (गाई)। |
| 13612 | कवासे | वि. | कवास हुने; कवासजस्तो। |
| 13613 | कवि | ना. | १. कविता वा काव्यको रचना गर्ने व्यक्ति। |
| 13614 | कवि | ना. | २. शुक्राचार्य; दैत्यगुरु। |
| 13615 | कवि | ना. | ३. वाल्मीकि। |
| 13616 | कवि | ना. | ४. क्रान्तदर्शी; ईश्वर। |
| 13617 | कविकर्म | ना. | कविको काम; कविता वा काव्य रचना गर्ने काम। |
| 13618 | कविकेशरी | ना. | १. नेपाली कविहरूलाई प्रदान गरिने नेपालको एक पदवी। |
| 13619 | कविकेशरी | ना. | २. कविहरूमध्येमा सिंह; श्रेष्ठ कवि। |
| 13620 | कविता | ना. | १. कविद्वारा आफ्ना संवेद्य अनुभूति वा स्फूर्त भावनालाई छन्द वा लयमा उनेर प्रस्तुत गरिएको पद्यात्मक वा गद्यात्मक साहित्यिक कृति वा रचना; काव्य; कविको भाव वा कविकर्म। |
| 13621 | कविता | ना. | २. व्यापक अर्थमा सबै प्रकारका पद्यात्मक वा गद्यात्मक रचना र सामान्यतः छन्द, गीत वा मुक्तकका विभिन्न प्रकारमा रचिएका कुनै एक विषय वा भावनाका फुटकर पद्यात्मक वा गद्यात्मक लययुक्त रचना। |
| 13622 | कवित्व | ना. | १. कविता वा काव्यरचनाको क्रिया, गुण, भाव वा विशिष्ट रूप। |
| 13623 | कवित्व | ना. | २. कवि वा कवितामा निहित गुण, विशेषता वा शक्ति। |
| 13624 | कविराज | ना. | १. आयुर्वेदीय औषधी प्रणालीमा शिक्षित वा विशिष्ट वैद्यको एक उपाधि। |
| 13625 | कविराज | ना. | २. कविहरूमा श्रेष्ठ; श्रेष्ठ कवि। |
| 13626 | कविवर | वि. | कविमा वरण गरिन योग्य; कविहरूमा श्रेष्ठतर। |
| 13627 | कविशिरोमणि | ना. | १. कविहरूमध्ये श्रेष्ठ वा शीर्षस्थ कवि। |
| 13628 | कविशिरोमणि | ना. | २. त्यस्ता कविलाई दिइने नेपालको एक राष्ट्रिय पदवी। [यो पदवी नेपाली भाषाका प्रसिद्ध कवि लेखनाथ पौड्याल (वि. सं. १९४१ - २०२२) लाई प्रदान गरिएको थियो।] |
| 13629 | कविसमय | ना. | प्रकृतिमा नहुने वा देश, काल आदिका कुरालाई पनि कविहरूले आफ्नो परम्परामा प्रयोग गर्दै आएका केही विशिष्ट परिपाटी वा मान्यता। (उदा.- युवतीका पादस्पर्शले अशोक फुल्छ; चातकले बादलबाट बर्सेको पानी चुच्चोमा थापेर खान्छ; इ.)। |
| 13630 | कविसम्मेलन | ना. | कवितापाठको कार्यक्रम सञ्चालित हुने कविहरूको सभा वा गोष्ठी; कुनै उत्सव, समारोह आदिमा भएको प्रतियोगी वा अप्रतियोगी कविजमातको जमघट। |
| 13631 | कवीन्द्र | ना. | कविहरूमध्येमा श्रेष्ठ कवि; महाकवि। (कान्तिपुरका मल्लराजा प्रताप मल्लले स्वयम् यो पदवी धारण गरेका थिए।) |
| 13632 | कवीन्द्रपुर | ना. | १. उत्कृष्ट कविहरूले निवास गरेको ठाउँ। |
| 13633 | कवीन्द्रपुर | ना. | २. प्रताप मल्लले बनाएको कान्तिपुरको मरुसत्तलअगाडिको भवन। |
| 13634 | कवै १ | क्रि.वि. | कहिल्यै पनि, कदापि। |
| 13635 | कवै २ | ना. | अलि कालो र फुस्रो गरी दुई प्रकारको हुने, गोल आकारका गेडा लाग्ने, सागले निद्रा लगाउने, पश्चिम नेपालमा 'कुर्साने' नामले चिनिने एक प्रकारको वनस्पति। |
| 13636 | कव्य | ना. | पितृदेवताहरूका निम्ति दिइने वा होमिने वस्तु (अन्न)। |
| 13637 | कशा | ना. | १. कोर्रा; चाबुक। |
| 13638 | कशा | ना. | २. डोरी। |
| 13639 | कशेरु | ना. | १. कसुर (एक प्रकारको सुपारी)। |
| 13640 | कशेरु | ना. | २. मेरुदण्डको हाड। |
| 13641 | कश्चित् | सर्व. | कोही; कुनै। |
| 13642 | कश्मल | ना. | १. पाप। |
| 13643 | कश्मल | ना. | २. मोह। |
| 13644 | कश्मल | ना. | ३. मूर्च्छा; बेहोसी। |
| 13645 | कश्मीर | ना. | भारतको पश्चिमोत्तर भागमा रहेको, पर्वतीय प्राकृतिक सौन्दर्यले युक्त तथा भारतीय सङ्घअन्तर्गतको प्रसिद्ध प्रान्तीय राज्य। |
| 13646 | कश्मीरी | वि. | हे. कस्मिरी। |
| 13647 | कश्मीरी मुद्रा | ना. | हे. कस्मिरी मुद्रा। |
| 13648 | कश्मीरी केशर | ना. | हे. कस्मिरी केशर। |
| 13649 | कश्यप | ना. | १. ब्रह्माका पौत्र तथा मरीचिका मानस पुत्र एक विख्यात प्रजापति; देवता तथा दानवहरूका जनक; मन्त्रद्रष्टा तथा गोत्रप्रवर्तक एक ऋषि; काश्यप ( यिनका दिति, अदिति, दनु, विनता, खसा, कद्रू, मुनि, क्रोधा, अरिष्टा, इरा, ताम्रा, इला र प्रधा गरी तेह्र स्त्रीहरू थिए भनिन्छ। यिनैबाट कश्यप र काश्यप गोत्रको परम्परा चलेको हो )। |
| 13650 | कश्यप | ना. | २. सप्तर्षिमण्डलका एक ताराको नाम। |