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| 8851 | उजुरी पत्र | ना. | उजुरीको कागत । |
| 8852 | उजेल्नु | स.क्रि. | भाँडाकुँडा, गरगहना आदिलाई आगोमा पोलेर वा अमिलो पदार्थ आदिले धोएर चम्किलो पार्नु; चमकदार बनाउनु। |
| 8853 | उजेलिनु | क.क्रि. | उजेलो पार्ने काम गरिनु । |
| 8854 | उजेली | वि. | १. झकझकी उज्यालो भएको; उज्ज्वल; जून लागेको (रात) । |
| 8855 | उजेली | वि. | २. अँध्यारोमा चमक आउने (ढुङ्गा, रुख आदि)। |
| 8856 | उजेलीकाठ | ना. | राति उज्यालो देखिने काठ । |
| 8857 | उजेलीपच्छे | ना. | शुक्लपक्ष। |
| 8858 | उजेली रात | ना. | जुनेली रात। |
| 8859 | उज्जन्ड | वि. | १. नियम, अनुशासनको पालन नगर्ने; रुखो स्वभावको ; उच्छृङ्खल; उद्धत । |
| 8860 | उज्जन्ड | वि. | २. कसैलाई नगन्ने; अटेरी । |
| 8861 | उज्जन्ड | वि. | ३. खरो स्वभावको; उद्दण्ड । |
| 8862 | उज्जर | वि. | १. चहकिलो; खुल्दो; चम्किलो । |
| 8863 | उज्जर | वि. | २. सफा; सुकिलो । |
| 8864 | उज्जर | वि. | ३. उज्यालो । |
| 8865 | उज्जीवन | ना. | बाँच्ने आस हराएको व्यक्तिले उपचार आदिद्वारा स्वास्थ्यलाभ गर्ने काम; नयाँ जीवनको प्राप्ति । |
| 8866 | उज्जीवित | वि. | पुनर्जीवन पाएको; फेरि जीवन प्राप्त गरेको । |
| 8867 | उज्जैन | ना. | भारतमा स्थित सात मोक्षपुरीमध्ये एक; महाकवि कालिदासको 'मेघदूत' खण्डकाव्यमा उल्लिखित ऐतिहासिक स्थान । |
| 8868 | उज्ज्वल | वि. | १. उज्यालो; चहकदार । |
| 8869 | उज्ज्वल | वि. | २. सफा; सुकिलो; निर्मल । |
| 8870 | उज्ज्वल | वि. | ३. निष्कलङ्क; बेदाग; कञ्चन । |
| 8871 | उज्ज्वलता | ना. | उज्ज्वल हुनाको भाव, गुण वा स्थिति; उज्यालोपन; चहक; चमक। |
| 8872 | उज्ज्वलन | ना. | १. चमक; कान्ति । |
| 8873 | उज्ज्वलन | ना. | २. बल्ने काम । |
| 8874 | उज्ज्वलन | ना. | ३. आगो । |
| 8875 | उज्ज्वलित | वि. | चम्किलो; उज्ज्वल पारिएको । |
| 8876 | उज्यालिनु | अ.क्रि. | उज्यालो देखिनु; चमकदार देखिनु । |
| 8877 | उज्यालो | वि. | १. अँध्यारो नभएको; प्रकाशयुक्त । |
| 8878 | उज्यालो | वि. | २. उज्जर; चम्किलो । |
| 8879 | उज्यालो | वि. | ३. सुहाउँदो; खुल्दो । ना |
| 8880 | उज्यालो | वि. | ४. प्रकाश; ज्योति । |
| 8881 | उज्राँती | ना. | हे. उजराती। |
| 8882 | उझाइ | ना. | उझाउने काम वा प्रक्रिया; उजाइ । |
| 8883 | उझाइनु | क.क्रि. | उझाउने काम गरिनु; उजाइनु । |
| 8884 | उझाउनु | स.क्रि. | हे. उजाउनु । |
| 8885 | उझिन्डिनु | अ.क्रि. | १. कुनै वस्तु अग्लो ठाउँमा डोरी आदिले बाँधिएर लट्किनु; झुन्डिनु; टाँगिनु । |
| 8886 | उझिन्डिनु | अ.क्रि. | २. घाँटीमा डोरी आदिको पासो लाएर आत्महत्या गर्नु । |
| 8887 | उझिन्डो | ना. | १. कुनै वस्तु झुन्ड्याउन दलिनमा बाँधी तल खसालिएको डोरी वा कडा; ठेकी, भुँड्को भाँडाको घाँटीमा बाँधिने डोरी । |
| 8888 | उझिन्डो | ना. | २. घाँडो; अल्झो । |
| 8889 | उझिन्ड्याइ | ना. | उझिन्डिने अवस्था वा काम। |
| 8890 | उझिन्ड्याइनु | क.क्रि. | उझिन्ड्याउने काम गरिनु । |
| 8891 | उझिन्ड्याउनु | स.क्रि. | १. झुन्ड्याउनु; टाँग्नु; लट्काउनु । प्रे.क्रि. [उझिन्डि+याउ+नु] |
| 8892 | उझिन्ड्याउनु | स.क्रि. | २. उझिन्डो पार्नु; उझिन्डिन लाउनु । |
| 8893 | उझिन्ड्याउनु | स.क्रि. | ३. घाँडो वा अल्झो लाउनु । |
| 8894 | उञ्छ | ना. | खेतबारीबाट बालीनाली काटेर भित्र्याइसकेपछि भुईंमा बाँकी रहेका वा मिल्किएका अन्न; सिला । |
| 8895 | उञ्छवृत्ति | ना. | खेतबारीमा बाली भित्र्याएपछि रहेपहेको अन्न वा बाला जम्मा गरेर जीविका चलाउने काम; त्यस्तो किसिमले गरिने जीवन निर्वाह। |
| 8896 | उञ्छशील | वि. | सिला खोजेर जीवन धान्ने (व्यक्ति) । |
| 8897 | उटक | ना. | १. पाहारिलो जमिन; अग्लो भूमि; थुम्की; टारी जमिन। |
| 8898 | उटक | ना. | २. पानी नलाग्ने जग्गा । |
| 8899 | उटज | ना. | घाँस, पराल वा स्याउला आदिले बनेको सानो घर; छाप्रो; झुप्रो; कुटी; झुपडी । |
| 8900 | उटपटाङ/उटपट्याङ | वि. | १. नचाहिँदो उपद्रो मात्र गरिरहने; उरन्ठेउलो। |