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| 33401 | झ्वाँकी पानी | ना. | ज्वानु, सिधेनुन, टिमुर आदि हाली पोलेको रातमाटोका डल्लाले झानेको तातो पानी। (रुघाखोकी र चिसो गढेको अवस्थामा यस्तो पानी औषधीका रूपमा खुवाइन्छ)। |
| 33402 | झ्वाइँय्य | क्रि.वि. | तिखोसित झ्वाइँ हुने गरी झ्वाइँय्य। |
| 33403 | झ्वाट्ट | क्रि.वि. | झट्ट तुरुन्त उत्तिखेरै। |
| 33404 | झ्वाप्प | क्रि.वि. | १. एकाएक ढाक्ने वा छोप्ने गरी। |
| 33405 | झ्वाप्प | क्रि.वि. | २. अपर्झट बत्ती निभ्ने किसिमले। |
| 33406 | झ्वाम्म | क्रि.वि. | एकै झमटमा पानीको गहिराइमा हाम फाल्ने चालसँग। |
| 33407 | झ्वाम्ल्याड्ड | क्रि.वि. | झ्वाम्म। |
| 33408 | झ्वार्र | क्रि.वि. | सुकेका घाँस, पराल आदिमा आगो लाग्दा शब्द आउने गरी; झ्यार्र |
| 33409 | झ्वास्स | क्रि.वि. | १. आगो झोस्ने गरी; पोल्ने चालसँग। |
| 33410 | झ्वास्स | क्रि.वि. | २. सूचना वा खबर नदिई ( आउने किसिम)। |
| 33411 | झ्वास्सभवास्स | क्रि.वि. | |
| 33412 | ञ | १. देवनागरी वर्णमालाको व्यञ्जनवर्णमध्ये दसौँ व्यञ्जन वर्ण; परम्परागत रूपमा तालव्य, स्पर्शी, सघोष, अल्पप्राण, अनुनासिक तर नेपाली उच्चारणअनुसार - ञकार प्रतिनिधित्व गर्ने लिपिचिहन; गोरुसिङ्गे 'यँ' ठहरिने व्यञ्जनवर्ण, चवर्गको अन्तिम तथा पाँचौँ अक्षर; लेख्य रूपमा सो व्यञ्जनवर्णको ञ ( नेपाली लेखनमा )। | |
| 33413 | ञ | २. नेपालीमा विभेदकता वा व्यतिरेक नभएको नासिक्य व्यञ्जन (नेपाली उच्चारणमा)। | |
| 33414 | ञकार | ना. | ञ' अक्षर; चवर्गको अन्तिम वर्ण। |
| 33415 | ट | देवनागरी वर्णमालाका व्यञ्जन वर्णमध्ये एघारौ वर्ण; मू॒र्धन्य ताडित, स्पर्शी, अघोष, अल्पप्राण व्यञ्जनवर्ण, टवर्गको पहिल अक्षर लेख्य रूपमा सो वर्णको प्रतिनिधित्व गर्ने लिपिचिहन ओठकाट्यो ट। | |
| 33416 | टँकाइ | ना. | टाँक्ने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया। |
| 33417 | टँकाइनु | क.क्रि. | टाँक्न लाइनु। |
| 33418 | टँकाउनु | प्रे. क्रि. | टाँक्न लाउनु। |
| 33419 | टँगरो | वि. | १. सुकुटे तर अग्लो; दुब्ल र अग्लो। |
| 33420 | टँगरो | वि. | २. टङ्ग्रङ परेको; टिङ्गरो। ना. |
| 33421 | टँगरो | वि. | ३. पातलो झोल; सङ्लो झोल वा रस; टुर्रो। |
| 33422 | टँगाइ | ना. | टाँग्ने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया। |
| 33423 | टँगाइनु | क. क्रि. | १. टाँग्ने काम गराइनु। |
| 33424 | टँगाइनु | क. क्रि. | २. झुन्ड्याउन लगाइनु। |
| 33425 | टँगाउनु | प्रे. क्रि. | १. टाँग्ने काम गराउनु। |
| 33426 | टँगाउनु | प्रे. क्रि. | २. झुन्ड्याउन लगाउनु। |
| 33427 | टँसाइ | ना. | टाँस्ने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया। |
| 33428 | टँसाइन् | क.क्रि. | टाँस्न लाइनु। |
| 33429 | टँसाउनु | प्रे.क्रि. | टाँस्न लाउनु। |
| 33430 | टँसिलो | वि. | टाँसिएको; ठिक्क मिलेको। |
| 33431 | टक १ | ना. | १. प्रकाशपुञ्जको चहक; सूर्य, चन्द्र, बत्ती आदिको प्रकाश; ‘पानी, ऐना वा यस्तै टलकदार वस्तुमा परेर अन्यत्र फर्केको उज्यालो; प्रतिबिम्ब। |
| 33432 | टक १ | ना. | २. एकसुरको हेराइ; आँखा झिम्म नगरीकनको हेराइ; स्थिरदृष्टि। |
| 33433 | टक १ | ना. | ३. लालसा; तीव्र इच्छा। (उदा.- हरिलाई पढ्ने टक बसेको छ )। |
| 33434 | टक २ | ना. | १. रुपियाँपैसा आदिमा लगाइएको सरकारी छाप; मुद्रा वा सिक्कामा लगाइने सरकारी चिह्न। |
| 33435 | टक २ | ना. | २. मुद्रा; सिक्का; रुपियाँपैसा। |
| 33436 | टकटक | ना. | १. साह्रो पदार्थमा केही कुराले आघात गर्दा वा धुलो आदि झार्नका लागि लुगा इत्यादि झट्कार्दा आउने ध्वनि। |
| 33437 | टकटक | ना. | २. ठकठक; टुकटुक; टिकटिक (ध्वनि)। |
| 33438 | टकटका | वि. | १. धनसम्पत्ति र जहान परिवार केही नभएको; टकटकिएको; निक्खरा एक्लो; टकटके; नाङ्गो। ना. |
| 33439 | टकटका | वि. | २. रुपियाँपैसा; सरसामान। |
| 33440 | टकटकाइ | ना. | १. टकटक गर्ने क्रिया वा प्रक्रिया। |
| 33441 | टकटकाइ | ना. | २. छैन भनी अभाव जनाउने क्रिया वा प्रक्रिया। एकसुरे हेराइ। |
| 33442 | टकटकाइनु | क.क्रि. | १. धुलो आदि झार्न झट्कारिनु। |
| 33443 | टकटकाइनु | क.क्रि. | २. टकटक ध्वनि निकाल्ने गरी आघात गरिनु। |
| 33444 | टकटकाइनु | क.क्रि. | ३. एक सुरले हेरिनु। |
| 33445 | टकटकाउँदो | वि. | निर्मल; उज्जर; सफा; स्वच्छ; राम्रो। |
| 33446 | टकटकाउनु | अ.क्रि. / स.क्रि. | १. अ.क्रि. टकटकको आवाज पैदा हुनु। |
| 33447 | टकटकाउनु | अ.क्रि. / स.क्रि. | २. छैन भनी अभावग्रस्त देखा पर्नु; टकटकिनु। स.क्रि. |
| 33448 | टकटकाउनु | अ.क्रि. / स.क्रि. | ३. धुलो आदि झार्नु; टकटक्याउनु। |
| 33449 | टकटकापुर | वि. / ना. | १. बिलकुल सेतो; एकदम सफा; स्वच्छ। ना. |
| 33450 | टकटकापुर | वि. / ना. | २. केही पनि नहुने स्थिति; अभाव; शून्यता; रिक्तता। |