|
|
|
|
|
|---|---|---|---|
| 43201 | द्रोह | ना. | २. प्रतिहिंसाको भावना; शत्रु साध्ने मनोवृत्ति। |
| 43202 | द्रोह | ना. | ३. वैरभाव; दुस्मनी। |
| 43203 | द्रोही | वि. | १. द्रोह गर्ने; अर्काको कुभलो चिताउने। |
| 43204 | द्रोही | वि. | २. प्रतिहिंसाको भावना राख्ने; वैरभाव बढाउने। ना. |
| 43205 | द्रोही | वि. | ३. विद्रोही। |
| 43206 | द्रौणिक | ना. | एक द्रोण बराबरको बिउ लाग्ने खेत। |
| 43207 | द्रौपदी | ना. | अर्जुनले मत्स्यभेद गरी स्वयंवर गरिएकी पाञ्चाल देशका राजा द्रुपदकी कन्या। |
| 43208 | द्वन्द्व | ना. | १. कुनै दुई वस्तुको जोडा; युग्म; युगल। |
| 43209 | द्वन्द्व | ना. | २. लोग्नेस्वास्नी; जोईपोइ; दम्पति। |
| 43210 | द्वन्द्व | ना. | ३. परस्पर दुई विरोधी तत्त्वको जोडा। |
| 43211 | द्वन्द्व | ना. | ४. दुई व्यक्तिका बिचको झगडा; द्वन्द्वयुद्ध; मल्लयुद्ध; कुस्ताकुस्ती। |
| 43212 | द्वन्द्व | ना. | ५. कलह; सङ्घर्ष; उत्पात। |
| 43213 | द्वन्द्व | ना. | ६. व्याकरणमा उभयपद प्रधान हुने समासको नाम (जस्तै- आमाबाबु। |
| 43214 | द्वन्द्व | ना. | ७. अल्को; झन्झट। |
| 43215 | द्वन्द्व | ना. | ८. कष्ट; दुःख। |
| 43216 | द्वन्द्व | ना. | ९. द्विविधा; संशय। |
| 43217 | द्वन्द्वचर/चारी | वि. | १. जोडा मिलेर हिँड्ने। ना. |
| 43218 | द्वन्द्वचर/चारी | वि. | २. चखेवा; चकोर। |
| 43219 | द्वन्द्वयुद्ध | ना. | दुई जनाका बिचको युद्ध,;कुस्ती; लाप्पा। |
| 43220 | द्वन्द्वी | वि. | १. जोडा तुल्याउने; युग्म बनाउने। |
| 43221 | द्वन्द्वी | वि. | २. परस्पर विरोधी; प्रतिद्वन्द्वी। |
| 43222 | द्वय | वि. | १. दुई; दुइटा। ना. |
| 43223 | द्वय | वि. | २. जोडा; युग्म। |
| 43224 | द्वयर्थ | ना. | १. दुई किसिमको अर्थ; दुई प्रकारको भाव। वि. |
| 43225 | द्वयर्थ | ना. | २. दुई अर्थ भएको दोहोरो भाव जनाउने। |
| 43226 | द्वयर्थक | वि. | दुई वा दुई प्रकारका अर्थ लाग्ने; दुइटा अर्थ भएको। |
| 43227 | द्वयाक्षायण | ना. | पुराणकालीन एक तपस्वी ऋषिको नाम। |
| 43228 | द्वयाभास | ना. | एउटै वस्तु दुइटाजस्तो देखिने स्थिति; आँखाको नानीलाई टेढो पारेर हेर्दा एउटा वस्तुका दुई स्वरूप देखिने अवस्था वा स्थिति। |
| 43229 | द्वयोष्ठ्य | वि. | दुई ओठका सहायताले उच्चरित हुने (ध्वनि)। (प वर्ग)। |
| 43230 | द्वादश | वि. | बाह्र। |
| 43231 | द्वादशाक्षर | ना. | बाह्र अक्षर भएको विष्णुको मन्त्र। ( ॐ नमो भगवते वासुदेवाय)। |
| 43232 | द्वादशाक्षरी | वि. | १. बाह्र अक्षर भएको (मन्त्र)। ना. |
| 43233 | द्वादशाक्षरी | वि. | २. क, ख आदिमा लाग्ने बाह्र किसिमको मात्रा ; बाह्रखरी। |
| 43234 | द्वादशात्मा | ना. | १. बाह्र आत्मा भएको देउता; सूर्य। |
| 43235 | द्वादशात्मा | ना. | २. आँक। |
| 43236 | द्वादशाह | ना. | १. बाह्र दिन। |
| 43237 | द्वादशाह | ना. | २. बाह्र दिनसम्म गरिने एक यज्ञ। |
| 43238 | द्वादशाह | ना. | ३. मरेको बाह्रौँ दिनका दिन गरिने श्राद्ध। |
| 43239 | द्वादशी | ना. | चन्द्रमासका शुक्ल वा कृष्णपक्षको बाह्रौँ तिथि; एकादशीका भोलिपल्टको तिथि; पूर्णातिथि। |
| 43240 | द्वापर | ना. | सत्य, त्रेता, द्वापर र कलिमध्ये तेस्रो युग; त्रेता र कलियुगका बिचको युग। |
| 43241 | द्वार | ना. | १. ढोका; दैलो। |
| 43242 | द्वार | ना. | २. ढोका बन्द गर्ने र खोल्ने फग्ल्याँटो; खापा। |
| 43243 | द्वार | ना. | ३. कुनै ठाउँ, क्षेत्र, नगर वा हाताभित्र पस्ने र त्यहाँबाट निस्कने खुला ठाउँ; प्रवेशपथ; बाहिरी ढोका। |
| 43244 | द्वार | ना. | ४. शरीरका इन्द्रियहरूको छिद्र। |
| 43245 | द्वार | ना. | ५. निकास; मुहान। ६ माध्यम। |
| 43246 | द्वार | ना. | ७. वास्तु तथा मूर्तिकलामा एक अङ्गुल वा मात्राको नौगुना बराबरको नाप ; प्रादेश, सूत्र वा ग्रह बराबरको नाप; नौ अमल; नौ अङ्गुल। |
| 43247 | द्वारका | ना. | द्वारिका। |
| 43248 | द्वारपाल / द्वारपालक | ना. | १. ढोकामा पहरा दिनलाई राखिएको व्यक्ति; ढोके। |
| 43249 | द्वारपाल / द्वारपालक | ना. | २. कुनै प्रधान देवताको मन्दिरको रक्षकका रूपमा रहने देवता। |
| 43250 | द्वाररक्षक | ना. | ढोके; द्वारपाल। |