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|---|---|---|---|---|
| 50701 | पग्ल्याइँ | ना. | बहुलट्टीपना, पागलपन। | |
| 50702 | पग्ल्याइ | ना. | पग्लिने क्रिया वा प्रक्रिया। | |
| 50703 | पग्ल्याहट | ना. | पग्ल्याइ। | |
| 50704 | पघार्नु | स.क्रि. | गाई- भैंसीका थुनबाट सजिलोसँग दुध आउने पार्नु थुनबाट कमलोसँग दुध झर्ने पार्नु, पगार्नु। | |
| 50705 | पघार्नु | स.क्रि. | २. कठोर मनको व्यक्तिको हृदयलाई प्रार्थना आदिद्वारा दयालु बनाउनु। | |
| 50706 | पघार्नु | स.क्रि. | ३. लोभीलाई दानी तुल्याउनु। | |
| 50707 | पघार | ना. | गाईभैंसीका थुनबाट खुलस्त रूपमा दुध झर्ने क्रिया। | |
| 50708 | पघार | ना. | २. गोरस। | |
| 50709 | पघार | ना. | ३. दुहुनो गाई वा भैंसी। | |
| 50710 | पघारा | ना. | थुनबाट सजिलैसित दुध झर्ने पार्नका निम्ति पाडो वा बाछालाई चुस्न लगाउने काम। | |
| 50711 | पघाराइ | ना. | पघार्ने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया पगाराइ। | |
| 50712 | पघारिनु | क.क्रि | पघार्ने काम गरिनु, पगारिनु। | |
| 50713 | पधारो | ना. | दुध पगार्नका निम्ति गाई-भैंसीका थुनमा दलिने नौनी, घिउ आदि चिप्लो पदार्थ, पगारो। | |
| 50714 | पघितो | वि. | हे. पगितो। | |
| 50715 | पधनु- | अ.क्रि | हे. पग्रनु। | |
| 50716 | पाइ | ना. | पघ्रने क्रिया वा प्रक्रिया। | |
| 50717 | पघ्राइनु | क.क्रि. | पघने पारिनु। | |
| 50718 | पाउनु | प्रे. क्रि | पघने पार्नु। | |
| 50719 | पघ्रिनु | अ.क्रि. | पग्रिनु। | |
| 50720 | पघ्याइ | ना. | पग्राइ। | |
| 50721 | पघ्ग्राहट | ना. | पग्याहट। | |
| 50722 | पङ्क | ना. | पानीले गलेको माटाको लेदो, हिलो। | |
| 50723 | पङ्क | ना. | २. धाप, दलदल, भास। | |
| 50724 | पङ्क | ना. | 3. दबदबे पदार्थ लेप। | |
| 50725 | पङ्क | ना. | ४. पाप कलङ्क। | |
| 50726 | पङ्कज | ना. | कमल वा त्यसको फूल। | |
| 50727 | पङ्कज | ना. | वि. २. हिलामा उत्पन्न हुने वा हिलामा उत्पन्न भएको। | |
| 50728 | पङ्कजासन | ना. | ब्रह्मा। | |
| 50729 | पङ्कजासन | ना. | २. योगका चौरासी आसनमध्ये एक, कमलासन। | |
| 50730 | पङ्कनरवानर | ना. | अश्मीभूत अस्थिअवशेषका रूपमा केन्यामा पाइएको, मानवजस्तो देखिने एक प्रकारको वानर, केन्यामानव। | |
| 50731 | पङ्किल | वि. | हिलो भएको, हिले, पङ्कयुक्। | |
| 50732 | पङ्किल | वि. | २. मैलो, फोहोर। | |
| 50733 | पङ्की | ना. | हिमाली प्रदेशमा प्रचलित भोटे समाजका नारीले लगाउने उनीद्वारा तयार गरिएको लुगाविशेष। | |
| 50734 | पङ्क्ति | कुनै जन्तु वा वस्तुको लाम, हार, लहर, ताँती; पाँती। | ||
| 50735 | पङ्क्ति | २. अक्षरको लहर, हरफ। | ||
| 50736 | पङ्क्ति | ३ दश सङ्ख्यालाई बुझाउने शब्द। | ||
| 50737 | पङ्क्तिबद्ध | वि. | लाम लागेको ताँती लागेको लस्कर लागेको। | |
| 50738 | पङ्क्ति बीजारोपण | ना. | हार मिल्ने हिसाबले बिउ रोप्ने काम। | |
| 50739 | पङ्क्तिरोपण | ना. | हार मिलाएर बोटबिरुवा रोप्ने काम पङ्क्तिबद्ध बीजारोपण। | |
| 50740 | पङ्ख | ना. | पखेटा। | |
| 50741 | पङ्ख | ना. | २. प्वाँख। | |
| 50742 | पखा | ना. | प्वाँख, पत्र, कागज, कपडा, धातु आदिद्वारा निर्मित, हावाको वेग पैदा गर्ने वा बढाउने उपकरण, हम्कने साधन। | |
| 50743 | पङ्खा फूल | ना. | एक मिटर अग्लो ठुलठुला भालाआकारको लामो भेटनापट्टि फुकेको हरिया पात हुने, पहेँलो फुल्ने, घोगा झैँ फल्ने र आयुर्वेदमा दाहक, पुष्टिकारक, पेटको रोग, कफ, पित्त, बान्ता, घाउ, सर्पले टोकेको आदिमा हित गर्ने बताइएको बुटीविशेष। | |
| 50744 | पङ्खी | ना. | पक्षी, चरो, पखेरु। | |
| 50745 | पगु | वि. | गोडाले हिँड्न नसक्ने, लङ्गडो। | |
| 50746 | पगु | वि. | २. परिस्थितिवश नराम्रो चाल चल्न बाध्य भएको। | |
| 50747 | पगु | वि. | ३. विनाकामको (व्यक्ति)। | |
| 50748 | पङ्गुता /त्व | ना. | पगु गराउने वा हुने भाव वा अवस्था। | |
| 50749 | पच्नु | अ.क्रि. | खाएको कुराले शरीरमा बिगार नगरी ताग आदि दिएर अनावश्यक भाग मलमूत्रका रूपमा परिणत भई मलद्वार वा मूत्राशय आदिबाट जान लायक हुनु हजम हुनु। | |
| 50750 | पच्नु | अ.क्रि. | २. लिएको वस्तु फर्काउन नपर्ने हुनु, पच हुनु। |