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| 16601 | कैवल्य | ना. | ३. मिश्रित नहुने काम; शुद्धता। | |
| 16602 | कैशिक | वि. | १. रौँ भएको वा केशयुक्त। | |
| 16603 | कैशिक | वि. | २. रौँजस्तो मसिनु वा झिनो। | |
| 16604 | कैशिकी वृत्ति | ना. | सुकोमल तथा सुकुमार अर्थ र सन्दर्भ भएको एवं चित्तलाई द्रवित पार्ने मधुरतायुक्त रचनाशैली; काव्यवृत्तिका तीन वृत्तिमध्ये एक। | |
| 16605 | कैशोर | ना. | एघारदेखि पन्ध्र वर्षसम्मको अवस्था; किशोर अवस्था वा उमेर। | |
| 16606 | को १ | सर्व. | १. कसैको चिनारी पाउन सोध्दा प्रयोग हुने शब्द; कुन; कुनचाहिँ। प्रत्य. | |
| 16607 | को १ | सर्व. | २. विशेषण बन्दा जोडिने शब्द (एकतमासको, असमेलको, भन्नुको इ.)। | |
| 16608 | को २ | विभ. | नेपाली व्याकरणअनुसार षष्ठीको सामान्य एक वचनमा लागेर अधीनस्थ वा सम्बन्ध बुझाउने विभक्ति वा रूपप्रत्यय। | |
| 16609 | कोँचाखीँ | ना. | १. बायाँ हातले काखी च्यापी दायाँ हातका औँलाले बजाइने, तबला र बामको बोल दुवै निस्कने, अर्धमृदङ्ग जातको एकमुखे बाजा। (नाट्येश्वरलाई मन पर्ने भनिएको यो बाजा धार्मिक यात्रा, विवाह आदिमा उपत्यकाका मानन्धर र महर्जनहरूद्वारा बजाउने गरिन्छ )। | |
| 16610 | कोँचाखीँ | ना. | २. पञ्चताल- वाद्यमध्येको मुख्य तालबाजा; पञ्चताल। | |
| 16611 | कोइरालो १ | ना. | एकै भेट्नामा दुई टुप्पा भएका पात हुने, रातो वा सेतो फूल फुल्ने र लामा लामा कोसा फल्ने एक बोट वा तरकारी, अचार आदि बनाएर खाइने त्यसैको फूल। | |
| 16612 | कोइरालो २ | ना. | १. रातो रातो खैरो रङ्गको, बिरालाका जातको सानो जङ्गली जन्तु। | |
| 16613 | कोइरालो २ | ना. | २. बिरालालाई खाने एक जातको ठुलो चरो। | |
| 16614 | कोइरी | ना. | तराईतिर तरकारीको खेती गर्ने र बेच्ने काम गर्ने एक जाति। | |
| 16615 | कोइला | ना. | १. खैरो वा कालो रङको बल्ने खनिजपदार्थ; पत्थरकोइला। | |
| 16616 | कोइला | ना. | २. अँगार; गोल। | |
| 16617 | कोइला पानी | ना. | इन्जिन चलाउनका निम्ति रेल, जहाज आदिमा दिइने कोइला र पानी। | |
| 16618 | कोइली | ना. | १. काग जस्तै तर चिल्लो कालो रङको, पुच्छर अलि लामो हुने, वसन्त ऋतुमा झ्याम्म परेको रुखको हाँगामा बसेर सुरिलो स्वरले 'कुहू-कुहू' वा 'को हो ? को हो ?' भन्दै कराउने प्रसिद्ध चरो। | |
| 16619 | कोइली | ना. | २. कोइलीको जस्तै स्वर भएकी प्रेमिकालाई प्रेमीले बोलाउँदा भन्ने शब्द; मायालु। | |
| 16620 | कोइली | ना. | ३. विरहिणी (प. ने.)। | |
| 16621 | कोइलो | ना. | मही पार्ने मधानीमा बेर्ने डोरीका टुप्पामा लगाइने काठको हत्ता; नेतीको टुप्पामा लगाइने मसिनु काठको टुक्रो। | |
| 16622 | कोइल्याँटो | ना. | १. देवपितृलाई धूप हालिने माटाको वा धातुको भाँडो; धुपौरो। | |
| 16623 | कोइल्याँटो | ना. | २. कोइला सल्काउने भाँडो। | |
| 16624 | कोक १ | ना. | १. पानीमा रहने हाँसजस्तो कालो पक्षी; चक्रवाक; चखेवा। | |
| 16625 | कोक १ | ना. | २. कोइली। | |
| 16626 | कोक १ | ना. | ३. कामशास्त्रका रचयिता एक आचार्य। | |
| 16627 | कोक २ | ना. | बोतलबन्द पेय, कोकाकोलाको छोटकरी रूप। हे. कोकाकोला। | |
| 16628 | कोकरी | ना. | बालबोलीमा कोक्रो; सानो कोक्रो। | |
| 16629 | कोकले | ना. | सुगाजत्रै र सुगा जस्तै रङको, टाउको रातो र चुच्चो हरियो हुने, आफैँले रुखमा टोड्को पारेर बस्ने र 'कुकुल- कुकुल' गरी कराउने चरो। | |
| 16630 | कोकशास्त्र | ना. | कोक नामक आचार्यद्वारा प्रणीत रतिविज्ञान वा कामकलासम्बन्धी ग्रन्थ; कामशास्त्र; रतिशास्त्र। | |
| 16631 | कोका १ | ना. | दक्षिणबाट उत्तरतिर बगेर बराहक्षेत्रमा कोसीसँग मिल्ने सानो खोलो। | |
| 16632 | कोका २ | ना. | तानमा धागाको टुंकी घुसारी दायाँबायाँ दुवैतिर वारपार छिराएर कपडा बुन्ने काठ; तानको बनौटो। | |
| 16633 | कोका ३ | ना. | पातहरू टिपी सुकाएर चिया जस्तै सेवन गरिने, दक्षिण अमेरिकामा पाइने एक जातको रुख वा त्यसै रुखको संस्कार गरिएको पात। | |
| 16634 | कोका कोला | ना. | फलफूलको रस र सोडासमेत मिसाई रासायनिक प्रक्रियाद्वारा प्रशोधित गरेर बोतलमा भरिएको पेय पदार्थ। | |
| 16635 | कोकिंचा मुहाली | ना. | साह्रै तिखो स्वर हुने, मुहाली-परिवारको फुकेर बजाइने सबभन्दा सानो बाजा। | |
| 16636 | कोकिल | ना. | कोइली। | |
| 16637 | कोकिला | ना. | कोइलीको पोथी; पोथी कोइली। | |
| 16638 | कोकिस | ना. | लाम्चा र बाङ्गा आकारका पारेर बनाइने केक रोटीको एक प्रकार। | |
| 16639 | कोकेन | ना. | कोका नामको वृक्षका पातबाट बनाइने मादक पदार्थ वा एक प्रकारको नसालु वस्तु। | |
| 16640 | कोको | ना. | ताडकै जस्तो रुखमा गुराँसका आकारका खस्रा र फुस्रा पात हुने, हाँगा वा काण्डमा पाटेदार खुर्सानी आकारका राता फल फल्ने एक वृक्ष वा त्यसैको फल। | |
| 16641 | कोकोहोलो | ना. | कुनै विशेष स्थितिमा वा आत्तिएर धेरै जनाले एकैपल्ट कराउँदा आउने आवाज; ठुलो हल्ला; होहल्ला; हल्लीखल्ली; कोलाहल; कोहोलो। | |
| 16642 | कोक्किनु | अ.क्रि. | १. काँचो कर्कलो, पिँडालु आदि खाँदा घाँटी क्याक्क हुनु वा जिभ्रामा लागेर सगसगाउनु। | |
| 16643 | कोक्किनु | अ.क्रि. | २. मनमा ठुलो पिर परे तापनि आवाज नफुट्नु; पिरले भित्रभित्रै कम्प छुटेर रुनु। | |
| 16644 | कोक्ती | ना. | मकै, गहुँ, मास, भटमास, केराउ आदि ढड्याएर बनाई तरकारी जस्तै खाइने एक प्रकारको क्वाँटी। | |
| 16645 | कोक्याइ | ना. | कोक्किने वा कोक्याउने क्रिया-प्रक्रिया। | |
| 16646 | कोक्याइनु | क.क्रि. | कोक्याउने बनिनु। | |
| 16647 | कोक्याउनु | स. क्रि. | पिँडालु, कर्कलो आदि खाँदा जिभ्रामा लागेर सगसगाउनु वा खसखस हुनु। | |
| 16648 | कोक्रो | ना. | १. नानीहरूलाई सुताएर हल्लाउने काममा प्रयोग गरिने चोया, बेत, तार, पाट आदिबाट बुनेको टोक्रो; झुलना; कोर्को। | |
| 16649 | कोक्रो | ना. | २. कैदीहरू हालेर बोकिने वा सजाय दिन झुन्ड्याइने टोकरी; तुरुङ। | |
| 16650 | कोक्रो | ना. | ३. चोयाको टोक्रो; चोयाको पिँजडा। |