|
|
|
|
|
|
|---|---|---|---|---|
| 30251 | जऱ्याङजुरुङ | ना. | २. त्यस्तो वेदना वा पीडा हुनेगरी। | |
| 30252 | जऱ्याङमऱ्याङ | ना. | १. शरीरमा पीडा नपर्ने खालको साधारण परिश्रम; हल्का किसिमको मिहिनेत। क्रि.वि. | |
| 30253 | जऱ्याङमऱ्याङ | ना. | २. त्यस्तो किसिमको परिश्रम वा मेहनत हुने गरी। | |
| 30254 | जर्रिनु | अ.क्रि. | १. कुनै चिज सुकेर वा छिप्पिएर अररो हुनु; जर्रो बन्नु; जरट्ठ पर्नु; ठर्रिनु।२. रिसले च्याँट्ठिनु; जर्किनु; जरक्क पर्नु। | |
| 30255 | जर्रो | वि. | १. कुनै वस्तु सुकेर वा छिप्पिएर अरट्ठ परेको; जर्खरिएको; कडा; ठर्रो। | |
| 30256 | जर्रो | वि. | २. जिराहा; अटेर। | |
| 30257 | जऱ्याई | ना. | जर्रिने क्रिया वा प्रक्रिया। | |
| 30258 | जऱ्याईनु | क.क्रि. | जर्रो पारिनु। | |
| 30259 | जऱ्याउनु | प्रे. क्रि. | अररो तुल्याउनु; जर्रो पार्नु। | |
| 30260 | जर्सी | ना. | १. ऊनबाट बनेको कपडाविशेष। | |
| 30261 | जर्सी | ना. | २. खेलाडीले खेल खेल्दा लगाउने पोसाक; ज्याकेट। | |
| 30262 | जर्सी गाई | ना. | गाईका विभिन्न जातमध्ये लामो आङ, लामै गर्दन हुने, जुरो नहुने र अगाडि नुहेको देखिने, विशेष खालको दुधालु गाई; विकासे गाई। | |
| 30263 | जल्नु | अ.क्रि. | १. कुनै वस्तु आगोले टिपेर सल्कनु; डढ्नु; बल्नु। | |
| 30264 | जल्नु | अ.क्रि. | २. कसैप्रति मनमा रिसइबी रहनु; अर्काको उन्नति सहन नसकेर डाह हुनु; असह्य हुनु। | |
| 30265 | जल्नु | अ.क्रि. | ३. घाउखटिरा आदिमा पीडा हुनु; डहनु। | |
| 30266 | जल | ना. | १. पानी; उदक। | |
| 30267 | जल | ना. | २. देवतालाई नुहाएको वा पूज्य जनका पाउ धोएको पानी; चरणामृत; चरणोदक। | |
| 30268 | जल | ना. | ३. विशिष्ट व्यक्तिलाई खान दिइने शुद्ध वा सफा पानी। | |
| 30269 | जल | ना. | ४. गङ्गा आदि नदीको चोखो पानी; पवित्र पानी। | |
| 30270 | जल उन्यु | ना. | पातबाट जरा निस्कने र जराबाट पनि बिरुवा उम्रने एक किसिमको उन्यु। | |
| 30271 | जलकण्टक | ना. | पानीफल; सिँगडा। | |
| 30272 | जलकन्न्या | ना. | पुराणमा वर्णित, मानिसका आकारकी सुन्दरी कन्न्या; जलपरी; नागकन्न्या। | |
| 30273 | जलकपूर | ना. | छ इन्चजति लामो र चेप्टो आकारको एक जातको माछो। | |
| 30274 | जलकपोत | ना. | नदीका तीरमा बस्ने परेवाका जातको पक्षी; पानीपरेवा; जलपरेवा। | |
| 30275 | जलकुक्कट | ना. | पानीकुखुरो; सिमकुखुरो। | |
| 30276 | जलकेलि | ना. | पानीमा पौडी खेल्ने र पानी छ्यापाछ्याप आदि गर्ने गरी गरिने क्रीडा; जलक्रीडा। | |
| 30277 | जलकौवा | ना. | पानीकाग। | |
| 30278 | जलक्रिया | ना. | जल अर्पण गरेर पितृहरूलाई दिइने तर्पण; जलाञ्जलि। | |
| 30279 | जलक्रीडा | ना. | १. नदी, तलाउ आदिमा युवकयुवती वा नायकनायिकाले परस्परमा पानी छ्यापाछ्याप आदि गरेर रागात्मक आनन्द लिने गरी खेल्ने खेल; जलकेलि; जलविहार। | |
| 30280 | जलक्रीडा | ना. | २. पानीमा पौडने वा खेल्ने काम। | |
| 30281 | जलक्षेत्र | ना. | पृथ्वीका सतहमा पानीले ढाकेजतिको भाग; जलमग्न क्षेत्र। | |
| 30282 | जलखाई | ना. | कुनै काममा लाग्नु वा निस्कनुअघिको हल्का खाना; चमेना। | |
| 30283 | जलगडा | ना. | पेटमा पानी जमेर विकार पैदा भई उत्पन्न हुने रोग; जलोदार। | |
| 30284 | जलगति विज्ञान | ना. | जलको प्रवाहलाई अध्ययन गर्ने शास्त्र। | |
| 30285 | जलगैँडा | ना. | पानीमा बस्ने गैँडाजस्तो जनावर; पानीगैँडा। | |
| 30286 | जलगोलार्ध | ना. | पानीको सतह धेरै पर्ने गोलार्ध; दक्षिणी गोलार्ध। | |
| 30287 | जलग्रह | ना. | जलोदर। | |
| 30288 | जलचर | ना. | पानीमा बसेर जीविका गर्ने जनावर; जलजीवी प्राणी; जलजन्तु। | |
| 30289 | जलचिकित्सा | ना. | प्राकृतिक चिकित्सापद्धतिअनुसार पेटको विकारलाई साफ गर्न कुनै यन्त्रद्वारा पेटमा पानी हुलेर गरिने उपचार; जलोपचार। | |
| 30290 | जलज | वि. | १. पानीमा उत्पन्न हुने; जलमा पैदा हुने। | |
| 30291 | जलज | वि. | २. पानीमा उत्पन्न वा पैदा भएको वस्तु (कमल, शङ्ख, सिपी, सिँवाली, माछो इ.)। | |
| 30292 | जलजन्तु | ना. | जलचर। | |
| 30293 | जलजम्बु | ना. | पानीमा हुने जामुनु; पानीजामुनु। | |
| 30294 | जलजीवी | वि. | १. पानीबाट जीविका चलाउने। ना. | |
| 30295 | जलजीवी | वि. | २. डुङ्गा चलाएर जीवन निर्वाह गर्ने व्यक्ति; माझी। | |
| 30296 | जलजल | क्रि.वि. | पानी नै पानी भएर; थलथल। | |
| 30297 | जलजलाउँदो | वि. | तातो पानी वा आगाले पोलेर अथवा अन्य कुनै कारणले फोका उठेर पानीपानी भरिएको। | |
| 30298 | जलजले | वि. | पानीपानी भएको; पानी खटिरो; पानी चढेको (फूल,फोको, घाउ आदि)। ना. तेह्रथुम जिल्लाको एउटा प्रसिद्ध ठाउँ। | |
| 30299 | जलजात | वि. | १. पानीमै उत्पन्न हुने; जलबाट पैदा भएको। ना. | |
| 30300 | जलजात | वि. | २. कमल, शङ्ख, माछा आदि। |