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| 52401 | पाचन | ना. | ३. भोजनलाई पचाउने औषधी; पाचक। |
| 52402 | पाचन क्रिया | ना. | खाएको अपक्व भोजनलाई पचाउने क्रिया। |
| 52403 | पाचन प्रणाली | ना. | वनस्पति तथा प्राणी दुवैले खाने खाद्य पचाउने विधि र मलोत्सर्ग गर्ने प्रक्रिया। |
| 52404 | पाचन यन्त्र | ना. | खाएको कुरो पाक गर्ने वा पचाउने यन्त्र वा अङ्ग; पाचकाङ्ग। |
| 52405 | पाचन रस | ना. | पाकस्थलीमा रहेका अन्नादि वस्तु पचाउनका निम्ति निस्केको एक किसिमको रस। |
| 52406 | पाचन वृद्धि | ना. | पाचनशक्तिको विकास वा भोकजगाइ। |
| 52407 | पाचनाङ्ग | ना. | पाचकाङ्ग; पाकस्थली। |
| 52408 | पाचनीय | वि. | १. पकाउन योग्य। |
| 52409 | पाचनीय | वि. | २. पचाउन सकिने; हजम गर्न सकिने। |
| 52410 | पाचयिता | वि. | १. खाद्य वस्तु पकाउने; पाचक। |
| 52411 | पाचयिता | वि. | २. पचाउने; हजम गर्ने। |
| 52412 | पाची | ना. | लाम्चा पात र मसिना खैरा मुजुरावाल फूल हुने, आयुर्वेदका अनुसार खटिरा र छालासम्बन्धी रोगलाई हित गर्ने एक जातको लहरो वा साग। |
| 52413 | पाचुकी/पाचुके | ना. | १. पारपाचुके गरेबापत प्रमाणका लागि लेखिएको कागत। |
| 52414 | पाचुकी/पाचुके | ना. | २. विवाहिता स्त्री र पुरुषले परस्परमा खुसीराजीसँग गरेको वैवाहिक सम्बन्धविच्छेद; पारपाचुके। |
| 52415 | पाच्छै | ना. | रायोको साग; पासाई; पाछाई। |
| 52416 | पाच्य | वि. | १. पकाउन योग्य; पकाउन सकिने। |
| 52417 | पाच्य | वि. | २. पचाउन योग्य; पचाउन सकिने। |
| 52418 | पाछ्नु | स.क्रि. | १. बाँस, नर्कट, उखु, मकै आदिमा पातका धारले शरीरका अङ्गलाई खोस्याउनु; दर्फऱ्याउनु। |
| 52419 | पाछ्नु | स.क्रि. | २. वैद्यद्वारा माईनिरोधका निम्ति टीका दिने काम गर्नु। |
| 52420 | पाछा | ना. | १. वंशको क्रम; गोत्र; पुर्खौली हाँगो। |
| 52421 | पाछा | ना. | २. पछि; पछाडि। |
| 52422 | पाछा | ना. | ३. नजिक; समीप। |
| 52423 | पाछाई | ना. | हे. पाच्छै (साग)। |
| 52424 | पाछिनु | क.क्रि. | १. मकै, उखु आदिका सुक्खा पातले शरीरका अङ्ग घोटिनु वा कोरिनु। |
| 52425 | पाछिनु | क.क्रि. | २. वैद्यद्वारा नारी वा पाखुरामा टीका दिने काम गरिनु। |
| 52426 | पाजली | ना. | १. तेर्सो बाटो। |
| 52427 | पाजली | ना. | २. यात्रा वा प्रस्थान। |
| 52428 | पाजी | ना. | १. गधाको बच्चो। |
| 52429 | पाजी | ना. | २. कसैलाई गालीका रूपमा भनिने शब्द। वि. |
| 52430 | पाजी | ना. | ३. दुष्ट; दुर्जन। |
| 52431 | पाजी | ना. | ४. नीच; तुच्छ। |
| 52432 | पाजीपन | ना. | दुष्टता; नीचता। |
| 52433 | पाञ्चजन्य | ना. | १. विष्णुले पञ्चजन नामक दैत्यलाई हराई लिएको शङ्ख। |
| 52434 | पाञ्चजन्य | ना. | २. पञ्चजन नामक दैत्यहरूको कुल वा वंश। |
| 52435 | पाञ्चभौतिक | वि. | पञ्चमहाभूतको; पञ्चमहाभूतले बनेको; पाँच भौतिक तत्त्व (पृथ्वी, जल, तेज, वायु र आकाश) सम्बन्धी। |
| 52436 | पाञ्चायन | ना. | १. गणेश, सूर्य, देवी, शिव र विष्णु- पाँच देवदेवीको समूह। |
| 52437 | पाञ्चायन | ना. | २. उक्त देवदेवीहरूको संयुक्त पूजा गर्ने सम्प्रदाय। |
| 52438 | पाञ्चाल | ना. | १. अचेलको पन्जाब-प्रदेशमा पर्ने एक प्राचीन देश। |
| 52439 | पाञ्चाल | ना. | २. त्यस देशको चन्द्रवंशी जाति। |
| 52440 | पाञ्चालिक | ना. | १. लिच्छविकालीन स्थानीय पञ्चायत वा समिति। |
| 52441 | पाञ्चालिक | ना. | २. उक्त समितिको सदस्य। |
| 52442 | पाञ्चालिका | ना. | १. पाँच खेतहरूको समुदाय। |
| 52443 | पाञ्चालिका | ना. | २. द्रौपदी। |
| 52444 | पाञ्चाली | ना. | १. पुतली; खेलौना। |
| 52445 | पाञ्चाली | ना. | २. साहित्यमा प्रसिद्ध एक प्रकारको रीति वा शैली। |
| 52446 | पाञ्चाली | ना. | ३. पाण्डवहरूकी सगोलकी स्त्री; द्रौपदी। |
| 52447 | पाञ्चाली | ना. | ४. स्थानीय प्रशासन तथा जनहितसम्बन्धी काम गर्ने पञ्चहरूको प्राचीन सभा; पाञ्चालिक। |
| 52448 | पाट्नु१ | अ.क्रि. | १. पानीले ढाक्नु; जमिनका चारैतिर पानीले भिज्नु। |
| 52449 | पाट्नु१ | अ.क्रि. | २. कुनै वस्तु सबै बजारमा लदाबदी पाइनु। |
| 52450 | पाट्नु२ | स.क्रि. | हेक्कामा राख्नु; सम्झनु। |