|
|
|
|
|
|
|---|---|---|---|---|
| 11301 | ऐश्वर्य | ना. | २. प्रभुत्व; आधिपत्य; प्रभुता । | |
| 11302 | ऐश्वर्य | ना. | 3. अष्टसिद्धिमध्ये एक । | |
| 11303 | ऐश्वर्य | ना. | ४. ईश्वरीय पद वा गुण; शक्ति । | |
| 11304 | ऐश्वर्य मत्त | वि. | धनसम्पत्तिको आधिक्यले गर्दा मात्तिएको; धनले मदमत्त । | |
| 11305 | ऐश्वर्यवान् | वि. | ऐश्वर्यले युक्त भएको; धनवान्; सम्पन्न; सम्पत्तिशाली। | |
| 11306 | ऐश्वर्यशाली | वि. | प्रशस्त सम्पत्ति भएको; सम्पत्तिशाली; धनवान् । | |
| 11307 | ऐस | ना. | १. जीवनको भौतिक सुखसुविधा, सोखसयल; आराम; चैन । | |
| 11308 | ऐस | ना. | २. जीवनमा प्राप्त गर्ने विषयवासनाको सुख; भोगविलास; अयस। | |
| 11309 | ऐसआराम | ना. | जीवनमा भोगिने सुखसुविधा; आरामचैन; भोगविलास; मोजमज्जा | | |
| 11310 | ऐसी | वि. | हे. ऐयासी । | |
| 11311 | ऐहलौकिक | वि. | यसै लोकमा भएको, यसै लोकसँग सम्बद्ध; यसै लोकको; सांसारिक; ऐहिक; इहलोकको । | |
| 11312 | ऐहिक | वि. | हे. ऐहलौकिक । | |
| 11313 | ऐहिकता | ना. | यस लोकमा हुनाको भाव; इहलौकिकता; सांसारिकता । | |
| 11314 | ओ | देवनागरी वर्णमालाको खास चलनचल्तीका स्वरवर्णमध्ये दसौँ स्वरवर्ण; परम्परागत रूपमा कण्ठओष्ठस्थानबाट उच्चारण हुने स्वरवर्ण मानिएको, भाषाविज्ञानअनुसार पश्च र आधाबन्द, गोलित स्वरवर्ण; लेख्य रूपमा सो स्वरवर्णको प्रतिनिधित्व गर्ने लिपिचिह्न । | ||
| 11315 | ओ | वि.बो. | १. सम्झना, विस्मय आदिमा बोलिने शब्द । (उदा.- ओ बल्ल पो मैले बुझेँ) । | |
| 11316 | ओ | वि.बो. | २. आफूभन्दा मनिकालाई बोलाउँदा प्रयोग गरिने शब्द; ए (उदा.- ओ श्याम ! यता आऊ) । | |
| 11317 | ओं | ना. | १. क्रमशः विष्णु, शिव र ब्रह्मालाई बुझाउने अ, उ, म मिलेर बनेको शब्द । | |
| 11318 | ओं | ना. | २. वेदपाठ गर्दा मन्त्रका रूपमा ऋचाका आगाडि पछाडि उच्चारण गरिने पवित्र ध्वनि (ॐ); प्रणव । | |
| 11319 | ओंकार | ना. | १. ओं अक्षर; प्रणव । | |
| 11320 | ओंकार | ना. | २. धार्मिक विश्वासअनुसार ब्रह्मा (अ), विष्णु (उ) र महेश्वर (म) को संयुक्त रूप । | |
| 11321 | ओं रामपट्ट | ना. | राजपरिवारका सदस्य तथा हिन्दू धर्मका विशिष्ट व्यक्तिलाई प्रदान गर्ने उद्देश्यले २००३ सालमा स्थापित एक पदक । | |
| 11322 | ओइ | वि.बो. | हे. ओ । | |
| 11323 | ओइरनु | स.क्रि. | १. चुलो, अगेनु आदिमा बसालिएको भाँडामा पकाउनाका निम्ति दाल, चामल, तरकारी आदि हाल्नु; ओइरिनु । | |
| 11324 | ओइरनु | स.क्रि. | २. कल, कोल आदिमा धान, मकै कुट्नपिँध्नका लागि हाल्नु । | |
| 11325 | ओइरनु | स.क्रि. | ३. रिसले कुनै वस्तु कसैलाई धेरै दिनु । अ.क्रि. | |
| 11326 | ओइरनु | स.क्रि. | ४. तरल, धुलो वा दानादार वस्तु ठुलो परिमाणमा पोखिनु वा चुहिनु । | |
| 11327 | ओइरनु | स.क्रि. | ५. लस्कर लाग्नु । | |
| 11328 | ओइरनु | स.क्रि. | ६. जाइलाग्नु । | |
| 11329 | ओइराइ | ना. | ओइरिने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया । | |
| 11330 | ओइराउनु | प्रे. क्रि. | ओइरिन लाउनु । | |
| 11331 | ओइरान | ना. | १. सतहसम्म नभई भिरालो परेको पाखो जग्गा, पहिरो । | |
| 11332 | ओइरान | ना. | २. बेला बेलामा भत्किरहने फस्को पाखो। | |
| 11333 | ओइरालो | वि. | छेलोखेलो; आफलताफल; पउल । | |
| 11334 | ओइरिनु | स.क्रि. | हे. ओइरनु । | |
| 11335 | ओइरो | ना. | १. नरोकिईकन निरन्तर खसिरहने पानी, अन्न आदिको ठुलो धारो। | |
| 11336 | ओइरो | ना. | २. लगातार आइरहेका धेरै मानिसको ताँती । | |
| 11337 | ओइरो | ना. | ३. अन्न आदिको थुप्रो । | |
| 11338 | ओइरो | ना. | ४. गाँस । | |
| 11339 | ओइरोपहिरो | वि. | छेलोखेलो; आफलताफल । | |
| 11340 | ओइलनु | अ.क्रि. | फूल, पत्र, सागपात आदिको ताजापन नष्ट हुनु । | |
| 11341 | ओइलाइ | ना. | ओइलाउने क्रिया वा भाव। | |
| 11342 | ओइलाइनु | अ.क्रि. | ओइलाउने काम होइनु । | |
| 11343 | ओइलाउनु | स. क्रि/ प्र.क्रि. | १. फूल, पत्र, सागपात आदिलाई घाममा राखेर अलिअलि सुकाउनु; दरसुको पार्नु; ओइलिएको पार्नु । | |
| 11344 | ओइलिनु | अ.क्रि. | सागपात आदिको ताजापन निख्रनु; ओइलनु । | |
| 11345 | ओइल्याइ | ना. | ओइलाइ । | |
| 11346 | ओइल्याइनु | क. क्रि. | ओइलिने पार्न लाइनु । | |
| 11347 | ओइल्याउनु | प्रे. क्रि. | ओइलिने पार्न लगाउनु; ओइलिने पार्नु; दरसुको पार्नु; केही केही सुकाउनु । | |
| 11348 | ओकट्नु | स.क्रि. | हे. ओगट्नु । | |
| 11349 | ओकटिनु | क. क्रि. | ओगटिनु । | |
| 11350 | ओकल्नु | स.क्रि. | खाएको वस्तु पेटमा नपुऱ्याई मुखैबाट बाहिर निकाल्नु; उकेल्नु । |